बच्चों को पोलिया कैसे होता है - लक्षण - बचाव के उपाय ➣ w3survey

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बच्चों को पोलिया कैसे होता हैं?



Childern को Polia कैसे होता है | पोलियो या बाल पक्षाघात साधारण अतः बच्चों को होने वाला एक भयंकर रोग है। लेकिन यह रोग बड़ों को भी हो सकता है। इस रोग के आक्रमण के समय बहुत से बच्चे मर जाते हैं। लेकिन जो बच्चे(Childern) बच जाते हैं उनमें से अधिकतर अपंग हो जाते हैं।

सन 1950 में अकेले अमेरिका में ही 33334 लोगों पर इस रोग का आक्रमण हुआ। सन 1952 में डेनमार्क, जर्मनी, जापान, बेल्जियम, कोरिया, सिंगापुर, और भारत में यह रोग भयंकर महामारी के रूप में फैला।

क्या तुम जानते हो कि यह रोग कैसे होता है और उसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

पोलियो रोग एक विषाणु द्वारा फैलता है। वायु से इस रोग के विषाणु मुंह में प्रवेश करते हैं और गले से होते हुए आंतो तक पहुंच जाते हैं। आंतो से यह विषाणु रक्त(Blood) में पहुंचकर सीधे केंद्रीय नाड़ी संस्थान(Central Nervous System) पर आक्रमण करते हैं। यह रीड की हड्डी की कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। मस्तिष्क में गति नियंत्रण करने वाले न्यूरॉन्स इनके द्वारा प्रभावित हो जाते हैं। शरीर की मांसपेशियों की कोशिकाएं इनके द्वारा नष्ट कर दी जाती है वह मांसपेशी फिर कोई काम नहीं कर सकती। इस प्रकार इन विषाणु द्वारा शरीर के किसी भी अंग का पक्षाघात हो जाता है।

पोलियों(Polia) होने के लक्षण 

पोलिया होने की संभावना में अगर आपको लगता है की रोगी polia की problem से झूझ रहा है तो निचे दिए गए लक्षण पोलिया(Polia) होने के हैं। 

 1. शुरू-शुरू में जब पोलियो के विषाणु शरीर में प्रवेश करते हैं तो सिर में हल्का-हल्का दर्द रहने लगता है।
 2. गला खट्टा रहने लगता है।
 3. हल्का बुखार हो जाता है और उल्टी की शिकायत होने लगती है।
 4. शरीर में बेचैनी रहती है।
 5. समय नींद की अवस्था देती है।
 6. 2-3 दिन में बुखार तेज हो जाता है।
 7. मरीज का स्वभाव बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है।
 8. कमर में और शरीर के दूसरे अंगों में बहुत तेज दर्द होने लगता है।
 9. गर्दन सख्त हो जाती है और आखिर में शरीर के किसी भी अंग का पक्षपात हो जाता है।
 10. यदि पैरों में बोलियों का प्रभाव हुआ है तो वह मरीज चल फिर नहीं सकता है।
 11. यदि रीड की हड्डी के ऊपर का भाग प्रभावित हुआ तो मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है।
 12. सांस घुटने से मरीज की मृत्यु हो जाती है।

पोलियों(Polia) की दवा के जन्मदाता या अविष्कारक 

1955 में अमेरिका के डॉक्टर जोनास साल्क(Dr. Jonas Salk) ने पोलियो से बचने के लिए एक टीके का आविष्कार किया था। यह टीका बंदर के गुर्दे से पोलियो के वायरस को लेकर और उसे मार कर बनाया गया था। थोड़े थोड़े समय के बाद तीन या चार इंजेक्शन लगवाने के बाद पोलियो होने का खतरा नहीं रहता था।
इसके बाद अमेरिका के डॉक्टर अल्बर्ट साबिर(Dr. albert Sabir) ने पोलियो निरोधक एक ऐसी दवा की खोज की जिसे केवल मुंह के द्वारा ही लिया जा सकता है। एक महीने के अंदर इस दवा को तीन बार लेने के बाद पोलियो होने का खतरा बिल्कुल समाप्त हो जाता है। यह दवा पोलियो के वायरस को कमजोर करके बनाई जाती है।
अमेरिका के डॉक्टर हेराल्ड कोक्स(Herald Cox) ने पोलियों की रोकथाम के लिए पी जाने वाली और भी सस्ती दवा कुछ ही वर्ष पहले बनाई है। यह दवा जीवित वायरसों से विकसित की गई है। इसे एक बार पीने से पोलियो होने का डर नहीं रहता है।

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पोलियों की रोकथाम के बचाव उपाए

पोलियों की रोकथाम के लिए बच्चों को polia के vexin के टीके लगवाना चाइये।
1. जन्म के time पर टीके लगवाना। 
2. छह सप्ताह पर टीके लगवाना। 
3. दश सप्ताह पर पोलिया से बचाव का टीका लगवाना।
4. चौदह सप्ताह पर टीका लगवाना। 
5. 1 से डेढ़ साल का बच्चा होने पर पोलिया टीका जरूर लगवाए।

बच्चों को व्यायाम करने की सलाह दे और उनको इसकी आदत दाल दे।


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पोलियो अभियान 

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